एसिड अटैक पीड़िता अब दिव्यांगता की श्रेणी में, जीवनभर मुफ्त इलाज और दवाओं की सुविधा मिलेगी

  • June 2, 2018
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सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (सीजीएचएस) के तहत एसिड अटैक पीड़िता भी अब दिव्यांगता की श्रेणी में आएंगे। इसके अलावा खून की गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों और न्यूरो की दिक्कत के कारण बोल पाने में अक्षम या असहज मरीजों को भी दिव्यांग माना जाएगा। साथ ही उन्हें जीवन भर मुफ्त इलाज एवं दवाओं की सुविधा प्रदान की जाएगी। यह आदेश केंद्रीय कर्मियों एवं पेंशनरों के अविवाहित दिव्यांग पुत्रों के लिए जारी किया गया है।

केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों के साथ उनके आश्रितों को जीवन भर सीजीएचएस से मुफ्त इलाज और दवाओं की सुविधा मिलती है। लाभार्थी के पुत्र को अधिकतम 25 वर्ष की आयु तक आश्रित माना जाता है लेकिन 25 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद उसकी सुविधाएं रोक दी जाती हैं। पुत्र यदि दिव्यांग है तो उसे जीवन भर के लिए आश्रित मानते हुए मुफ्त इलाज एवं दवाओं की सुविधा दी जाती है।

बता दें कि दिव्यांगता की श्रेणी में किस तरह के मरीज आएंगे, इसके लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने काफी पहले एक सूची जारी की थी। इसमें दिव्यांगता की विभिन्न श्रेणियों की विस्तार से व्याख्या की गई थी। अब इसमें संशोधन कर दिया गया है। कई नए मामलों को भी दिव्यांगता की श्रेणी में शामिल किया गया है।

अब यदि किसी कर्मचारी या पेंशनर का अविवाहित पुत्र एसिड अटैक का पीड़ित है और इसकी वजह से उसके चेहरे, हाथ, पैर या किसी अंग को 40 फीसदी से अधिक क्षति हुई है तो उसे दिव्यांगता की श्रेणी में लाते हुए जीवन भर मुफ्त इलाज एवं दवाओं की सुविधा प्रदान की जाएगी। पहले केवल सुन पाने में अक्षम मरीजों को ही दिव्यांगता की श्रेणी में रखा गया था लेकिन अब किसी लाभार्थी का अविवाहित पुत्र न्यूरो की समस्या या किसी दूसरे कारण से 40 फीसदी या उससे अधिक बोल पाने में अक्षम है तो उसे भी दिव्यांग माना जाएगा। इसके अलावा ब्लड डिसऑर्डर की बीमारी से जूझ रहा मरीज भी दिव्यांग माना जाएगा। इसमें सिकल सेल डिसीज, हीमोफीलिया और थैलेसीमिया जैसी बीमारियां शामिल हैं।

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