आधार कार्ड: SC ने कहा- सरकारी योजनाओं और नागरिकों की निजता के अधिकारों के बीच संतुलन बनाना जरूरी

  • January 30, 2018
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आधार कार्ड की संवैधानिक वैधता से जुड़े मामले की सुनवाई सुुप्रीम कोर्ट में शुरू हो गई है. आधार की अनिवार्यता को लेकर सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस ए के सीकरी, जस्टिस ए एम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड और जस्टिस अशोक भूषण की संवैधानिक बेंच कर रही है. इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि इस वक्त देश आतंकवाद और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे खतरों से जूझ रहा है, सरकारी योजनाओं और नागरिकों की निजता के अधिकारों के बीच संतुलन बनाना जरूरी हो गया है.

मामले पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करते हुए कह चुका है कि जब प्राइवेट पार्टियों के साथ जानकारियां शेयर की जा सकती है तो फिर सरकार के साथ शेयर करने में क्या दिक्कत है. मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा है कि हमको इंश्योरेंस, फोन चाहिए हो तो हम प्राइवेट पार्टी के पास जाते हैं. अगर प्राइवेट कंपनी आपसे एड्रेस प्रूफ मांगती है, तो आपको कोई दिक्कत नहीं. लेकिन सरकार मांगती है तो ये आपकी पहचान से जुड़ जाता है.

नागरिकों के अधिकारों की हत्या- याचिकाकर्ता

इस मामले के याचिकाकर्ता श्याम दीवान ने पीठ के सामने कहा है कि आधार को जरूरी करना नागरिकों के अधिकारों की हत्या करने के बराबर है. याचिकाकर्ता ने कहा है कि नागरिकों के संविधान को सरकार के संविधान में बदलने की कोशिश की जा रही है.

याचिकाकर्ता ने 5 जजों की पीठ के सामने कहा है कि आधार प्रोजेक्ट ही चुनौती के दायरे में है, उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट की कोई  टाइम लिमिट नहीं है. यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है. याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि आधार की बायोमैट्र‍िक व्यवस्था में कई खामियां हैं. जिससे इसपर कई सवाल भी उठे है.

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