प्रेस की आजादी को लेकर 138वें नंबर पर भारत, तो उत्तर कोरिया सबसे फिसड्डी

  • April 26, 2018
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प्रेस की आजादी के मामले में भारत दो पायदान लुढ़क कर 138वें नंबर पर आ गया है। प्रेस की आजादी पर नजर रखने वाली एक संस्था ने बुधवार को अपनी रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया है। संस्था का आरोप है कि रैंकिंग में पिछड़ने की वजह गौरी लंकेश जैसी पत्रकार के खिलाफ हिंसा है।

तो वहीं, ‘रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ ने कहा कि इस सूची में नॉर्वे लगातार दूसरे साल पहले पायदान पर कायम है। संस्था ने उत्तर कोरिया को इस मामले में सबसे ज्यादा दमनकारी देश करार दिया और कहा कि उसके बाद तुर्कमेनिस्तान, सीरिया और चीन का भी रिकॉर्ड काफी खराब है। 180 देशों की सूची में चीन दूसरे साल भी 175वें स्थान पर बना हुआ है।

रिपोर्ट में चेताया गया है कि घृणा अपराध भारत में दूसरा बड़ा मसला है। इसमें कहा गया है कि 2014 में जब से नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने हैं, तब से हिंदू कट्टरपंथी पत्रकारों के प्रति काफी आक्रामक हो गए हैं।

रिपोर्ट में पत्रकार गौरी लंकेश को इसके उदाहरण के तौर पर पेश किया गया है। रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स में कहा गया है कि इस रैंकिंग में भारत के पिछड़ने का बड़ा कारण पत्रकारों के खिलाफ हिंसा है। इसके अलाव तीन और पत्रकारों की हत्या को भी रिपोर्ट में शामिल किया गया है। इसमें कहा गया है कि अन्य हत्याओं के कारण साफ नहीं हैं, जो आमतौर पर ग्रामीण इलाकों में होती हैं और वहां रिपोर्टर को बहुत कम वेतन दिया जाता है।

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