कहीं ये ”कृषि दर्शन” को बर्बाद करने की साजिश तो नहीं !

  • March 20, 2018
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सूचना और प्रसारण मंत्रालय और प्रसार भारती के बीच जारी तनातनी का असर देश के किसानों पर पड़ता हुआ दिखाई दे रहा है। सूत्रों की मानें तो पिछले कई दशकों से देश के किसानों के बीच लोकप्रिय कार्यक्रम ‘’कृषि दर्शन’’ को डीडी किसान पर शिफ्ट किया जा सकता है। लेकिन विडंबना ये है कि डीडी किसान की हालत बेहद खराब है और इसकी टीआरपी भी बहुत नीचे जा चुकी है। ऐसे में कृषि दर्शन जैसे कार्यक्रम इसलिए भी वहां पर भेजे जा रहे हैं जिससे कृषि दर्शन की लोकप्रियता को भुनाया जा सके यानि कृषि दर्शन से जुड़े दर्शक डीडी किसान देखना शुरू करें। लेकिन समस्या ये है कि लोग डीडी नेशनल ही देखना पसंद करते है, डीडी किसान नहीं। वैसे भी डीडी किसान की हालत तो ये है कि सनम हम तो डूबेंगे ही, तुम्हें भी ले डूबेंगे। ऐसे में कहीं ऐसा ना हो कि वर्षों से चला आ रहा किसानों के लिए पूरी तरह से समर्पित कृषि दर्शन कार्यक्रम भी डीडी किसान पर शिफ्ट होने से अकाल मृत्यु को प्राप्त हो जाए।

पिछले 51 सालों से हो रहा है ”कृषि दर्शन” का प्रसारण

बता दें कि दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम ‘’कृषि दर्शन’’ की शुरुआत 26 जनवरी 1967 को हुई थी। यह भारतीय टेलिविजन के इतिहास में सबसे लंबी अवधि तक चलने वाले कार्यक्रमों में से एक है। दूरदर्शन का ये ऐसा कार्यक्रम है जो स्टूडियो से बाहर निकलकर खेत-खलिहान और बाग-बगीचों के अलावा किसानों की चौपाल तक पहुंचा।

किसानों की जानकारी का सशक्त माध्यम

हर किसान के दिल में अपनी खास जगह बनाए हुए है कृषि दर्शन। कृषि से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी के अलावा कृषि के क्षेत्र में पूरी दुनिया में हो रहे नए-नए प्रयोगों की जानकारी इस कार्यक्रम के माध्यम से किसान रोजाना पाते हैं। खेती के लिए नई तकनीक और उन्नत बीजों के बारे में भी किसानों को जानकारी मिलती है। इसके अलावा किसानों के लिए चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी कृषि दर्शन कार्यक्रम के माध्यम से किसानों तक पहुंचाई जा रही है।

दरअसल प्रसार भारती एवं सूचना और प्रसारण मंत्रालय के आला अफसरों में पिछले कई दिनों से रस्साकशी जारी है। हाल ही में प्रसार भारती के कर्मचारियों की सैलरी को लेकर भी दोनों आमने-सामने थे। और अब दूरदर्शन के सबसे पुराने कार्यक्रम कृषि दर्शन को डीडी किसान पर शिफ्ट करने को लेकर दोनों के बीच जंग जारी है। परिणाम चाहे जो भी हो नुकसान तो देश के किसानों का ही होगा जिन्हें लेकर मौजूदा मोदी सरकार बेहद संजीदा है।

तस्वीर साभार-गूगल

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