क्या कर्नाटक में 33 साल पुरानी परंपरा टूटेगी या रहेगी बरकार?

  • May 12, 2018
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कर्नाटक विधानसभा चुनाव के मतदान के लिए आज सूबे के 4.97 करोड़ मतदाता 2600 से ज्यादा प्रत्याशियों की किस्मत का बटन दबाएंगे। आज सभी की नजरें मतदाताओं पर टिकी हैं कि क्या वे 33 साल से चली आ रही सत्तारूढ़ दल को हटाने की परंपरा को तोड़कर कांग्रेस को फिर से सत्ता सौंपेगे या फिर सत्ता की बागडोर बीजेपी के हाथों में देंगे। गौरतलब है कि 1985 में रामकृष्ण हेगड़े के नेतृत्व में जनता दल ने लगातार दूसरी बार सरकार बनाई थी। इसके बाद कोई भी पार्टी ऐसा कर पाने में सफल नहीं हुई।

भाजपा 2008 से 2013 तक राज्य की सत्ता पर काबिज रही, लेकिन अंदरूनी कलह और भ्रष्टाचार के मामलों के कारण कर्नाटक को स्थिर सरकार नहीं दे पाई। पांच साल में बने तीन सीएम में एक बीएस येदियुरप्पा को भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल भी जाना पड़ा था। सीएम सिद्धारमैया का कहना है कि इतिहास उनके खिलाफ है, लेकिन वह इतिहास रचेंगे। सिद्धारमैया समेत चार पूर्व मुख्यमंत्री चुनाव मैदान में हैं।

वैसे भाजपा ने इतिहास को दोहराने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है। पार्टी ने अपना प्रचार अभियान 150 सीटों के लक्ष्य के साथ शुरू किया। हालांकि, ये अलग बात है कि गुरुवार को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने 130 सीटों पर जीत का दावा किया। 2013 के उलट केजेपी बनाने वाले येदियुरप्पा और बीएसआर कांग्रेस का गठन करने वाले बी. श्रीरामुलु इस बार भाजपा के साथ हैं। भाजपा के लिए पीएम ने खुद अभियान की कमान संभाली तो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी आक्रामक नजर आए।

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